{"product_id":"ret-samadhi-geetanjali-shree","title":"रेत-समाधि \/ Ret-Samadhi","description":"\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eअन्तरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार (2022) से सम्मानित उपन्यास · हिन्दी का पहला उपन्यास जिसे यह सम्मान मिला\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cem\u003eयह \u003cstrong\u003eTomb of Sand\u003c\/strong\u003e का मूल हिन्दी उपन्यास है।\u003c\/em\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eअस्सी की होने चली दादी ने विधवा होकर परिवार से पीठ कर खटिया पकड़ ली। परिवार उसे वापस अपने बीच खींचने में लगा। प्रेम, वैर, आपसी नोकझोंक में खदबदाता संयुक्त परिवार। दादी बजि़द कि अब नहीं उठूँगी।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eफिर इन्हीं शब्दों की ध्वनि बदलकर हो जाती है — अब तो नई ही उठूँगी। दादी उठती है। बिलकुल नई। नया बचपन, नई जवानी, सामाजिक वर्जनाओं-निषेधों से मुक्त, नए रिश्तों और नए तेवरों में पूर्ण स्वच्छन्द।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहर साधारण औरत में छिपी एक असाधारण स्त्री की महागाथा तो है ही \u003cem\u003eरेत-समाधि\u003c\/em\u003e, संयुक्त परिवार की तत्कालीन स्थिति, देश के हालात और सामान्य मानवीय नियति का विलक्षण चित्रण भी है। और है एक अमर प्रेम प्रसंग व रोज़ी जैसा अविस्मरणीय चरित्र।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकथा लेखन की एक नयी छटा है इस उपन्यास में। इसकी कथा, इसका कालक्रम, इसकी संवेदना, इसका कहन, सब अपने निराले अन्दाज़ में चलते हैं। हमारी चिर-परिचित हदों-सरहदों को नकारते लाँघते। इसका संसार परिचित भी है और जादुई भी, दोनों के अन्तर को मिटाता।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eऔर सरहदें भी हैं जिन्हें लाँघकर यह कृति अनूठी बन जाती है, जैसे स्त्री और पुरुष, युवक और बूढ़ा, तन व मन, प्यार और द्वेष, सोना और जागना, संयुक्त और एकल परिवार, हिन्दुस्तान और पाकिस्तान, मानव और अन्य जीव-जन्तु — या गद्य और काव्य: ‘धम्म से आँसू गिरते हैं जैसे पत्थर। बरसात की बूँद।’\u003c\/p\u003e\u003ch4\u003eलेखिका के बारे में\u003c\/h4\u003e\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eगीतांजलि श्री\u003c\/strong\u003e को \u003cem\u003eरेत-समाधि\u003c\/em\u003e के लिए 2022 का अन्तरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला। यह उपन्यास 2021 के Emile Guimet Prize की शॉर्टलिस्ट में भी शामिल था। उनके पाँच उपन्यास, पाँच कहानी-संग्रह और एक शोध-ग्रन्थ प्रकाशित हो चुके हैं। अन्य उपन्यास: \u003cem\u003eमाई\u003c\/em\u003e, \u003cem\u003eहमारा शहर उस बरस\u003c\/em\u003e, \u003cem\u003eतिरोहित\u003c\/em\u003e, \u003cem\u003eखाली जगह\u003c\/em\u003e। उन्हें वनमाली राष्ट्रीय पुरस्कार, कृष्ण बलदेव वैद पुरस्कार, कथा यू.के. सम्मान, हिन्दी अकादमी साहित्यकार सम्मान, द्विजदेव सम्मान और हार्पर बाज़ार वुमन ऑफ़ द ईयर अवार्ड 2024 से भी सम्मानित किया जा चुका है।\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cem\u003eआवरण कलाचित्र: डेजी रॉकवेल · आवरण सज्जा: अनिल आहूजा\u003c\/em\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":52465471324376,"sku":"9789387462250","price":479.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0818\/1471\/6632\/files\/Ret-Samadhi_83_87e7db90-b338-4cc9-979e-58157d306fb3.webp?v=1789479456","url":"https:\/\/www.readersparadise.co\/products\/ret-samadhi-geetanjali-shree","provider":"Readers Paradise","version":"1.0","type":"link"}